कख लगाण छुई || Kakh Lagan Chui
- Rawat
- 04 Aug 2023
Song Line Lyrics
कख लगाण छुई कैमा लगाण छुई
ये पहाड़ की कुमौ गड़वाल की
कख लगाण छुई कैमा लगाण छुई
रिता कूडों की तीसा भांडों की
रिता कूडों की तीसा भांडों की
बगदा मनख्यूं की रडदा डाँडों की
कख लगाण छुई कैमा लगाण छुई
ये पहाड़ की कुमौ गड़वाल की
कख लगाण छुई कैमा लगाण छुई
सर्ग तेरी आशा कब आलू चौमासा
सर्ग तेरी आशा कब आलू चौमासा
गंगा जमुनाजी का मुल्क मनखी गोर प्यासा
कख लगाण छुई
क्या रूडी क्या हयुन्द पाणी नीच बूंद
क्या रूडी क्या हयुन्द पाणी नीच बूंद
फिर बणी च योजना बल देखा अब क्या हून्द
कख लगाण छुई
रिता कूडों की तीसा भांडों की
रिता कूडों की तीसा भांडों की
बगदा मनख्यूं की रडदा डाँडों की
कख लगाण छुई कैमा लगाण छुई
ये पहाड़ की कुमौ गड़वाल की
कख लगाण छुई कैमा लगाण छुई
बैख डुबयाँ दारू मा नौना टुन्न यारू मा
बैख डुबयाँ दारू मा नौना टुन्न यारू मा
कजेणी आन्दोलन चलाणी दफ्तर बाजारू मा
कख लगाण छुई
कच्ची गद्न्य छान्यु मा पक्की खुली दुकान्यु मा
कच्ची गद्न्य छान्यु मा पक्की खुली दुकान्यु मा
दारू का उद्योग खुल्याँ उंकी मेहर्बंयु मा
कख लगाण छुई
रिता कूडों की तीसा भांडों की
रिता कूडों की तीसा भांडों की
बगदा मनख्यूं की रडदा डाँडों की
कख लगाण छुई कैमा लगाण छुई
ये पहाड़ की कुमौ गड़वाल की
कख लगाण छुई कैमा लगाण छुई
कुड़ी टूटणी ठेस मा छिपाडा लाग्यां रेस मा
कुड़ी टूटणी ठेस मा छिपाडा लाग्यां रेस मा
भीतर मूसा बिराला बस्याँ मनखी भैर देश मा
कख लगाण छुई
न भीतर न भैर कखी भी नीच खैर
न भीतर न भैर कखी भी नीच खैर
दिन मा गिज्युं बाघ रात भ्युन्चाला की डैर
कख लगाण छुई
रिता कूडों की तीसा भांडों की
रिता कूडों की तीसा भांडों की
बगदा मनख्यूं की रडदा डाँडों की
कख लगाण छुई कैमा लगाण छुई
ये पहाड़ की कुमौ गड़वाल की
कख लगाण छुई कैमा लगाण छुई
जंगल खेर बाढ़ मा खेती बाड़ी त्याड मा
जंगल खेर बाढ़ मा खेती बाड़ी त्याड मा
सार खायी बान्दरून सगोडी गै उज्याड़ मा
कख लगाण छुई
कर्ज गाडी पैन्छू फैलूं मा अल्झी भैन्सू
कर्ज गाडी पैन्छू फैलूं मा अल्झी भैन्सू
गोर दुब्याँ बाड़ मा सूखू पोडी ऐंसू
कख लगाण छुई
रिता कूडों की तीसा भांडों की
रिता कूडों की तीसा भांडों की
बगदा मनख्यूं की रडदा डाँडों की
कख लगाण छुई कैमा लगाण छुई
ये पहाड़ की कुमौ गड़वाल की
कख लगाण छुई कैमा लगाण छुई
कख लगाण छुई कैमा लगाण छुई
This song has Lyrics of Kakh Lagan Chui . Narendra Singh Negi